
शाहपुरा, 10 अगस्त। बारहठ महाविद्यालय में सोमवार को युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत कार्यवाह डॉ. शंकर लाल माली रहे। मुख्य अतिथि बारहठ महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, भीलवाड़ा के जिला अध्यक्ष डॉ. पुष्करराज मीणा थे। कार्यक्रम में शाहपुरा के नगर संघचालक श्री कन्हैया लाल भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदे एवं भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर सामूहिक वंदे मातरम् के साथ हुई। युवाओं से संवाद करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. शंकर लाल माली ने कहा कि भारत की संस्कृति प्रारंभ से ही सह-अस्तित्व के विचार को स्वीकार करती रही है। जिस प्रकार जड़ और चेतन का सह-अस्तित्व है, उसी प्रकार भारतीय समाज की विभिन्न पीढ़ियां परस्पर संवाद और सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ती रही हैं। भारत केवल साम्राज्यवाद में विश्वास रखने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ने वाली संस्कृति है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष सम्मान दिया गया है। राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर और सीता-राम जैसे उदाहरणों में नारी शक्ति को प्रमुख स्थान दिया गया है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएं सामाजिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य करती रही हैं। वेद, पुराण और गीता जैसे ग्रंथ जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हैं।
डॉ. माली ने कहा कि प्राचीन भारत शिक्षा का विश्व का प्रमुख केंद्र रहा है। तक्षशिला, नालंदा और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालयों में देश-विदेश के विद्यार्थी एवं विद्वान अध्ययन करने आते थे। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘अतिथि देवो भवः’ भारतीय जीवन संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जाने वाले भ्रम और दूषित विमर्श से सचेत रहने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं को तर्कशील सोच विकसित करनी चाहिए तथा किसी भी विषय पर निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का विश्लेषण करना चाहिए। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान एवं तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है और इसे आगे बढ़ाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से तलाशना चाहिए। आंदोलन और उग्र आंदोलन एक ओर जहां राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक एवं राजनीतिक वैमनस्य को भी जन्म देते हैं।
मुख्य वक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें युवा संवाद भी एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य युवाओं के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी जिज्ञासाओं और समस्याओं को समझना है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। विद्यार्थियों ने पूछा कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान को पाठ्य सामग्री का हिस्सा क्यों नहीं बनाया जा रहा है। स्कूलों एवं महाविद्यालयों में काउंसलिंग की व्यवस्था क्यों नहीं है, जबकि युवाओं को इस स्तर पर मार्गदर्शन की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वहीं परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को बढ़ावा देने संबंधी सवाल भी विद्यार्थियों ने उठाए।
मुख्य अतिथि डॉ. पुष्करराज मीणा ने युवा संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य नागरिकों सहित 200 से अधिक युवाओं एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
