हर चुनाव में विकास के वादे, जीत के बाद जनता की समस्याएं जस की तस!

कादेड़ा में 10-12 दिन में पेयजल आपूर्ति, 80 लाख की सोनोग्राफी मशीन तीन साल से बंद; स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण बरकरार

कादेड़ा, 15 अक्टूबर। चुनाव आते ही गांव में विकास के दावे, घर-घर जनसंपर्क और मतदाताओं से समर्थन की अपील तेज हो जाती है। हर प्रत्याशी गांव की तस्वीर बदलने और चहुंमुखी विकास का भरोसा दिलाता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इन वादों पर कितना अमल होता है, इसकी हकीकत कादेड़ा की बुनियादी समस्याएं बयां कर रही हैं। पेयजल संकट, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन साल से बंद सोनोग्राफी मशीन, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण जैसे मुद्दे अब भी समाधान की बाट जोह रहे हैं।

पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच सरपंच पद के करीब एक दर्जन दावेदार विकास का एजेंडा लेकर मैदान में हैं। वहीं, 19 वार्डों में 200 से अधिक वार्ड पंच दावेदार भी मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल है कि पिछले जनप्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल में इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रयास किए और अब चुनाव मैदान में उतरे दावेदार इन्हें दूर करने के लिए क्या ठोस कार्ययोजना लेकर आए हैं?

10-12 दिन में नलों से पानी, डेढ़ करोड़ की योजना अधूरी

कादेड़ा की रेगर बस्ती, पुराने कादेड़ा सहित कई मोहल्लों में पेयजल आपूर्ति 10 से 12 दिन के अंतराल में हो रही है। लंबे समय से बनी इस समस्या के समाधान के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से भराई में पंप हाउस बनाने और भराई से कादेड़ा तक नई पाइपलाइन बिछाने की योजना प्रस्तावित है, लेकिन योजना का काम पूरा नहीं होने से ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही। पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण कई बार राजमार्ग तक जाम कर चुके हैं। इसके बावजूद नियमित जलापूर्ति का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। चुनाव में विकास के वादों के बीच ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उन्हें पर्याप्त और नियमित पानी कब मिलेगा?

80 लाख की सोनोग्राफी मशीन तीन साल से स्टोर रूम में

कादेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच के लिए करीब 80 लाख रुपए की लागत से आई सोनोग्राफी मशीन तीन साल से शुरू होने का इंतजार कर रही है। उपयुक्त कक्ष और संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की व्यवस्था नहीं होने के कारण मशीन स्टोर रूम में रखी है। सरकारी अस्पताल में सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद इसका लाभ जरूरतमंद महिलाओं को नहीं मिल पा रहा। मशीन को चालू कराने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने, विशेषज्ञ की व्यवस्था करने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की जरूरत है। सवाल यह है कि लाखों रुपए की मशीन तीन साल से अनुपयोगी पड़ी है तो इसे शुरू कराने के लिए अब तक प्रभावी पहल क्यों नहीं हुई?

स्कूलों में शिक्षकों की कमी, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित

कादेड़ा के बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय और महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित सरकारी स्कूलों में एक दर्जन से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर सरकारी स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना जरूरी है। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय शिक्षा व्यवस्था सुधारने का वादा नहीं करें, बल्कि रिक्त पद भरवाने के लिए ठोस पैरवी भी करें।

गोचर भूमि से मेला ग्राउंड तक अतिक्रमण का मुद्दा बरकरार

पंचायत क्षेत्र में गोचर भूमि, पशु मेला ग्राउंड, शाहपुरा रोड, आलमबू रोड और विजयनगर रोड सहित विभिन्न स्थानों पर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। सार्वजनिक उपयोग की भूमि और सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखना पंचायत प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ग्रामीणों की मांग है कि अतिक्रमण की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक भूमि का संरक्षण हो सके। चुनावी वादों के बीच यह मुद्दा भी मतदाताओं के लिए अहम बना हुआ है।

19 वार्डों में 200 से अधिक पंच दावेदार, सरपंची के लिए करीब एक दर्जन चेहरे

कादेड़ा ग्राम पंचायत के 19 वार्डों में वार्ड पंच बनने के लिए 200 से अधिक दावेदार मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। वहीं, सरपंच पद के लिए भी करीब एक दर्जन दावेदार गांव के विकास का भरोसा दिला रहे हैं। चुनावी माहौल में जनसंपर्क और वादों का दौर जारी है, लेकिन गांव की बुनियादी समस्याएं प्रत्याशियों के सामने बड़ी चुनौती हैं।

अब मतदाताओं के सामने फैसला केवल वादों और दावों के आधार पर नहीं, बल्कि इस कसौटी पर भी होगा कि कौन पेयजल संकट दूर करने, सोनोग्राफी मशीन शुरू कराने, स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरवाने और सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए स्पष्ट एवं व्यावहारिक कार्ययोजना प्रस्तुत करता है। कादेड़ा के ग्रामीणों को अब आश्वासनों से आगे बढ़कर धरातल पर विकास कार्यों का इंतजार है।

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