
250-300 की रोजाना ओपीडी, फिर भी आधे चिकित्सकीय पद खाली; दो माह से जरूरी सिरप का टोटा, एक माह से बिना प्रभारी चल रहा केंद्र
केकड़ी, 22 सितंबर। कादेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों को इन दिनों दवा और डॉक्टर दोनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। करीब दो माह से खांसी और सांस संबंधी मरीजों के लिए जरूरी सिरप सहित कई दवाइयां उपलब्ध नहीं होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। वहीं चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद लंबे समय से रिक्त होने से रोजाना 250 से 300 मरीजों की ओपीडी वाली इस सीएचसी की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि निशुल्क दवा योजना के तहत दवा नहीं मिलने पर मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की है।सीएचसी में छह चिकित्सा अधिकारियों के स्वीकृत पदों में से तीन खाली बताए गए हैं। इनमें मेडिसिन और सर्जरी के कनिष्ठ विशेषज्ञों के दो पद तथा एक चिकित्सा अधिकारी का पद शामिल है। दो वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के स्वीकृत पदों में से भी एक पद रिक्त है। इससे उपलब्ध चिकित्सकों पर काम का अतिरिक्त भार पड़ने की बात सामने आई है।
स्वास्थ्यकर्मियों के स्तर पर भी कई पद खाली हैं। सीनियर नर्सिंग ऑफिसर का एक, लैब टेक्नीशियन के दो, लैब असिस्टेंट का एक, तकनीकी सहायक का एक तथा एलडीसी-यूडीसी सहित कार्यालयीन पद रिक्त बताए गए हैं।
कादेड़ा सीएचसी पर कादेड़ा के अलावा खवास, भराई, पिपलाज, मेहरूकलां सहित करीब आठ ग्राम पंचायतों के ग्रामीण उपचार के लिए निर्भर हैं। रोजाना 250 से 300 की ओपीडी के बीच स्टाफ की कमी का असर मरीजों की जांच और उपचार व्यवस्था पर पड़ने का दावा ग्रामीण कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराने के बावजूद रिक्त पदों को भरने और दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सीएचसी में आवश्यक दवाइयों की खरीद के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा अजमेर से दवाइयां लाने वाले वाहन के भुगतान का मामला भी अटका हुआ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दवाइयों की आपूर्ति के लिए परिवहन व्यवस्था ही सुचारु नहीं होगी तो मरीजों को समय पर निशुल्क दवा मिलना मुश्किल है।सीएचसी की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र वर्मा के पदोन्नत होने के बाद करीब एक माह से किसी अन्य अधिकारी को प्रभारी अथवा पीएमओ का चार्ज नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित प्रभारी नहीं होने से प्रशासनिक कार्यों और मरीजों से जुड़ी योजनाओं की निगरानी प्रभावित हो रही है।ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से सीएचसी की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रिक्त पदों पर नियुक्ति, जरूरी दवाइयों की नियमित उपलब्धता और तत्काल प्रभारी नियुक्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सात दिन में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
इनका कहना—“स्वास्थ्य केंद्र का चार्ज अब तक किसी के पास नहीं आया है। खांसी की सिरप, सांस की सिरप सहित कई दवाइयां आगे से नहीं आ रही हैं। बजट का भी अभाव है, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण कार्य अटके हुए हैं।”
— डॉ. जितेंद्र मीणा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, कादेड़ा सीएचसी