लसाड़िया धुवालिया बांध से सिंचाई का पानी छोड़ने की मांग तेज, ऊपरी क्षेत्र में पानी जाने से किसानों में आक्रोश; 15 अक्टूबर को जूनिया में जुटेंगे ग्रामीण
उमाशंकर वैष्णव केकड़ी
खेतों में सरसों की बुवाई का समय है, चने की फसल को भी पानी की दरकार है, लेकिन लसाड़िया धुवालिया बांध की नहर बंद होने से किसानों की उम्मीदें पानी के इंतजार में अटकी हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने की आशंका ने नहरी क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जूनिया, केसरपुरा, कन्नौज, छाबड़िया और बघेरा सहित आसपास के गांवों के किसान बांध की नहर खोलकर पानी छोड़ने की मांग को लेकर लामबंद होने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि बांध का पानी ऊपरी क्षेत्र की ओर जा रहा है। वहीं, डीजल पंप सेट लगाकर पानी निकाले जाने की शिकायतों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। किसानों को आशंका है कि यदि पानी की निकासी पर निगरानी नहीं रखी गई तो बांध का जलस्तर घट सकता है और जरूरत के समय नहरी क्षेत्र के खेतों को सिंचाई का पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा।
पानी के इंतजार में अटकी खेती की उम्मीदें
रबी की फसल किसानों के लिए सालभर की मेहनत और परिवार की आर्थिक उम्मीदों से जुड़ी है। सरसों की बुवाई के लिए खेतों में पिलाई जरूरी है, वहीं चने की फसल के लिए भी समय पर सिंचाई की आवश्यकता है। ऐसे में नहर नहीं खुलने से किसानों को फसल प्रभावित होने की चिंता सता रही है। किसानों के अनुसार, बांध से जुड़ी हजारों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई इस पानी पर निर्भर है। समय पर पानी नहीं मिला तो बुवाई से लेकर फसल की बढ़वार तक असर पड़ सकता है।
15 अक्टूबर को जूनिया में जुटेंगे किसान
नहर खोलने की मांग को लेकर 15 अक्टूबर 2026 को जूनिया में गणेशजी की बड़ी बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में किसान नेता नंदलाल माली, किशनलाल यादव, राधाकिशन नेकाड़ी, सत्यनारायण, शंकरलाल, उगमा जी, बालूराम, रघुनाथ, किशनलाल, महावीर, हेमराज गुर्जर, रोडू सहित ग्रामीण भाग लेंगे।
बैठक में नहर खोलने, सिंचाई के लिए पानी छोड़ने और पानी वितरण की व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। किसानों का कहना है कि फसलों की जरूरत को देखते हुए अब और देरी उनके हित में नहीं है।
किसानों की दो टूक—पहले खेतों तक पहुंचे पानी
किसानों ने मांग की है कि लसाड़िया धुवालिया बांध की नहर खोलकर नहरी क्षेत्र के गांवों तक पानी पहुंचाया जाए। साथ ही बांध के पानी की निकासी पर निगरानी रखी जाए और डीजल पंप सेट से पानी निकाले जाने की शिकायतों की जांच हो। किसानों का कहना है कि बांध का पानी जिस क्षेत्र के खेतों की सिंचाई के लिए जरूरी है, वहां के किसानों को समय पर पानी मिलना चाहिए।
अब देखना यह है कि किसानों की मांग पर जिम्मेदार विभाग कब तक कदम उठाता है। फिलहाल नहर खुलने की उम्मीद में बैठे किसानों की निगाहें 15 अक्टूबर की बैठक पर टिकी हैं। उनके लिए यह केवल पानी की मांग नहीं, बल्कि रबी की फसल और पूरे सीजन की मेहनत बचाने का सवाल है।
