काबरिया में 70 किसानों को उन्नत कलौंजी बीज समेत कृषि किट वितरित

काबरिया में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को ‘अजमेर निजेला-20’ कलौंजी बीज एवं कृषि आदान किट वितरित करते अतिथि।



‘अजमेर निजेला-20’ की खेती को लेकर किसानों को दिया प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती और बीज संबंधी समस्याओं के समाधान की दी जानकारी

केकड़ी 23 सितंबर
बीज मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम काबरिया में बुधवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर की ओर से अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत राज्य सरकार के सहयोग से एक दिवसीय अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन सह आदान वितरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलौंजी की उन्नत प्रजाति ‘अजमेर निजेला-20’ को लेकर किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. चेतन कुमार जांगिड़ ने बीज मसाला फसलों में प्राकृतिक खेती की उपयोगिता और इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने तथा फसलों में बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग की जानकारी दी।प्रशिक्षण के दौरान राम बलाई ने किसानों को बीज से संबंधित समस्याओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों की बीज संबंधी जिज्ञासाओं और समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी साझा की। किसानों को उन्नत बीज के उपयोग तथा खेती में गुणवत्तापूर्ण बीज के महत्व के बारे में भी बताया गया।राज्य सरकार की ओर से शंकर लाल बैरवा, नंद किशोर मीणा एवं वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक किशन लाल जाट ने कार्यक्रम में किसानों का पंजीयन किया। इस दौरान किसानों को राज्य सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं और उनके लाभ की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों से योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और पात्रता के संबंध में भी जानकारी साझा की।कार्यक्रम में अनुसूचित जाति वर्ग के 70 किसान शामिल हुए। SCSP के तहत सभी किसानों को कृषि आदान उपलब्ध कराए गए। प्रत्येक किसान को 3 किलो कलौंजी (निजेला) बीज, एक मिल्क कैन, किचन गार्डनिंग पाइप एवं बैग किट वितरित की गई। किसानों को कलौंजी की उन्नत प्रजाति ‘अजमेर निजेला-20’ के प्रदर्शन के माध्यम से वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तक उन्नत बीज, वैज्ञानिक कृषि तकनीक और आवश्यक कृषि आदान पहुंचाने के साथ बीज मसाला फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना रहा। प्रशिक्षण में किसानों ने विशेषज्ञों से खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त की और अपनी समस्याओं पर चर्चा की।

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