मेवदाकला 22 जुलाई
ग्राम तसवारिया में ग्रामवासियों के सहयोग से 22 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा का वाचन वैदेही दासी विनी किशोरी द्वारा किया जा रहा है तथा आयोजन राधा रानी गौशाला, सिरोही के संस्थापक पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में हो रहा है।

कथा प्रारंभ से पूर्व मंदिर परिसर से गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा ग्राम के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करते हुए नगर परिक्रमा की।कथा के प्रथम दिवस में कथा वाचक वैदेही दासी विनी किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक में भगवान को प्रणाम करते हुए उनके स्वरूप, स्वभाव और दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया है। भागवत को समझना भगवान को समझने के समान है। उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर ही ऐसे पावन अनुष्ठानों का अवसर प्राप्त होता है तथा श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण जीव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण वेदों का सार है और सबसे पहले सुकदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित को इसका श्रवण कराया था। कथा के माध्यम से उन्होंने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार विद्यालय जीवनयापन का ज्ञान देता है, उसी प्रकार भागवत कथा जीवन को सही दिशा और श्रेष्ठ आचरण की प्रेरणा देती है।
कथा वाचक ने कहा कि कलियुग में मनुष्य के कल्याण का सबसे सरल मार्ग श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और उसके उपदेशों का पालन है। केवल कथा सुनना ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण, श्रीमद्भगवद्गीता, माता-पिता और गुरु के बताए मार्ग पर चलना भी आवश्यक है। श्रेष्ठ कर्मों से ही व्यक्ति का जीवन सफल होता है और वही उसे भक्ति, वैराग्य तथा अंततः ईश्वर की प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है।