प्राचीन आराध्य देव के प्राकट्य दिवस पर वैदिक मंत्रों से अभिषेक, कथा-कीर्तन और महाआरती में उमड़ी आस्था
केकड़ी 13 सितंबर। बघेरा की धार्मिक पहचान और आस्था के केंद्र आराध्य देव भगवान वराह का प्राकट्य दिवस हरितालिका तीज के पावन अवसर पर वराह मंदिर में पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया गया। प्राचीन मंदिर परिसर दिनभर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भगवान वराह के जयघोष से गुंजायमान रहा।

प्राकट्य दिवस के अवसर पर भगवान वराह की प्रतिमा का पंचगव्य, पंचामृत एवं सुगंधित इत्र से विधिवत अभिषेक किया गया। मंदिर की प्राचीन परंपराओं के अनुरूप हुए इस अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर महावीर उपाध्याय एंड पार्टी ने देर रात तक भगवान वराह का यशोगान किया।धार्मिक आयोजन में बसंत ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष भंवरलाल चौधरी मुख्य यजमान रहे। रुद्री पाठ के दौरान सुरेंद्र पाठक, रामसहाय श्रृंगी सहित पंडितों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। पुजारी परिवार के संदीप पाठक, हर्षित पाठक एवं उमेश पाठक ने भगवान वराह का सहस्रधारा अभिषेक कराया।अभिषेक के बाद पंडित वेद प्रकाश पुरोहित ने भगवान श्री वराह के प्राकट्य एवं उनकी महिमा का वर्णन करते हुए कथा सुनाई। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। कथा पूर्ण होने के बाद विधिवत महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर स्वर्गीय रामचंद्र चौधरी पीटीआई के पुत्र महेंद्र चौधरी ने भगवान वराह को पोशाक अर्पित की। धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने भगवान वराह के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-शांति और खुशहाली की मंगलकामना की।