
कहीं जातीय समीकरणों की बिसात, कहीं पुराने चेहरों पर दांव; आरएलपी और निर्दलीयों की दस्तक से भाजपा-कांग्रेस की बढ़ेगी चुनौती
उमाशंकर वैष्णव, केकड़ी।
गांवों की चौपालों पर चर्चाएं तेज हैं, राजनीतिक खेमों में गुणा-भाग शुरू हो गया है और दावेदार अपने-अपने जनाधार को टटोलने में जुट गए हैं। केकड़ी पंचायत समिति के चुनावी रण में अभी नामों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। सात वार्डों से सामने आ रहे संकेत बता रहे हैं कि इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं सिमट सकता। आरएलपी और निर्दलीय दावेदार कई सीटों पर चुनावी गणित बदलने की ताकत बन सकते हैं।
वार्डवार उभर रही तस्वीर में कहीं राजपूत-जाट समीकरण चर्चा में हैं, तो कहीं धाकड़-गुर्जर आमने-सामने होने के आसार हैं। किसी वार्ड में पूर्व प्रधान का नाम सुर्खियों में है, तो कहीं निवर्तमान सदस्य के फिर मैदान में उतरने की चर्चा है। हालांकि, ये सभी नाम और समीकरण फिलहाल संभावित दावेदारों से जुड़ी चर्चाओं पर आधारित हैं। अंतिम तस्वीर अधिकृत प्रत्याशी सूची के बाद ही सामने आएगी।
वार्ड 2 : धाकड़ बनाम गुर्जर, सीधी टक्कर के आसार
वार्ड नंबर 2 में भाजपा की ओर से धाकड़ समाज और कांग्रेस की ओर से गुर्जर समाज के प्रत्याशी का नाम लगभग तय होने की चर्चा है। दोनों दल यदि इन्हीं चेहरों पर भरोसा जताते हैं, तो मुकाबला आमने-सामने का हो सकता है। इस सीट पर जातीय समीकरणों के साथ प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और ग्रामीण मतदाताओं का रुझान अहम रहेगा।
वार्ड 3 : राजपूत-जाट समीकरण के बीच निर्दलीय की चाल
वार्ड नंबर 3 में भाजपा से राजपूत और कांग्रेस से जाट प्रत्याशी के नाम की चर्चा तेज है। दोनों प्रमुख दलों के बीच संभावित मुकाबले में निर्दलीय दावेदार की मौजूदगी नया मोड़ ला सकती है। निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरता है तो वोटों का बंटवारा किसके पक्ष में जाएगा, इस पर राजनीतिक निगाहें टिकी रहेंगी।
वार्ड 4 : दोनों दलों का बैरवा समाज पर भरोसा
वार्ड नंबर 4 में भाजपा और कांग्रेस दोनों की ओर से बैरवा समाज के प्रत्याशी उतारे जाने की चर्चा है। संभावित उम्मीदवारों को हरी झंडी मिलने की बात सामने आ रही है। अब इस सीट पर संगठन की ताकत, बूथ स्तर की तैयारी और प्रत्याशियों का व्यक्तिगत जनसंपर्क निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
वार्ड 6 : पूर्व प्रधान सीमा चौधरी के नाम से मुकाबले में गर्माहट
वार्ड नंबर 6 में कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रधान सीमा चौधरी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। भाजपा की ओर से जाट समाज के एक चेहरे को उतारे जाने के संकेत हैं। इस बीच आरएलपी से गुर्जर प्रत्याशी की संभावित एंट्री मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है। यदि तीनों दल मैदान में उतरते हैं, तो मतों का बंटवारा और स्थानीय समीकरण इस वार्ड की चुनावी दिशा तय करने में अहम होंगे।
वार्ड 10 : निवर्तमान सदस्य की वापसी की चर्चा
वार्ड नंबर 10 में भाजपा की ओर से निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य को फिर से मैदान में उतारने की चर्चा है। कांग्रेस ने भी संभावित प्रत्याशी के नाम पर लगभग सहमति बना ली है, जबकि आरएलपी की ओर से उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई जा रही है। यहां अनुभव बनाम नए चेहरे की बहस चुनावी चर्चा का केंद्र बन सकती है।
वार्ड 12 : कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी लगभग तय, आरएलपी भी मैदान में
वार्ड नंबर 12 में कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम लगभग तय कर लिए हैं। दोनों दलों की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं और जल्द ही आधिकारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं आरएलपी ने भी इस वार्ड में अपना दांव खेलते हुए प्रत्याशी उतारने की तैयारी के संकेत दिए हैं।
इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी किसी स्थानीय दावेदार के मैदान में उतरने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में आते हैं, तो वार्ड 12 में मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के सामने अपने परंपरागत मतदाताओं को एकजुट रखने के साथ-साथ संभावित वोटों के बंटवारे से निपटने की चुनौती रहेगी।
वार्ड 13 : पैराशूटी चेहरे की चर्चा, मुकाबला बहुकोणीय होने के संकेत
वार्ड नंबर 13 में कांग्रेस की ओर से ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी का नाम चर्चा में है, जबकि भाजपा की ओर से पैराशूटी उम्मीदवार को मौका दिए जाने की अटकलें हैं। आरएलपी और निर्दलीय दावेदार की संभावित मौजूदगी इस वार्ड को खास बना रही है। यदि सभी दावेदार चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है और दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने मतदाताओं को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी।
वार्ड 14 : सामान्य महिला सीट पर माली समाज की दावेदारी
वार्ड नंबर 14 देवगांव सीआर क्षेत्र की सीट है, जिसे सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित बताया जा रहा है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों की ओर से माली समाज की महिला प्रत्याशियों के नामों की चर्चा है। निर्दलीय दावेदारी की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में महिला प्रत्याशियों का जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार्यता चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
टिकट की घोषणा के बाद खुलेगा असली चुनावी खेल
केकड़ी पंचायत समिति के इन सात वार्डों में सामने आ रही चर्चाएं बताती हैं कि टिकट वितरण के साथ चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। भाजपा-कांग्रेस के सामने अपने संगठन और परंपरागत मतदाताओं को साधने की चुनौती है, वहीं आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशियों की संभावित मौजूदगी मुकाबले का समीकरण बदल सकती है।
फिलहाल दावेदारों के नामों पर चर्चाओं का दौर जारी है। अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा, नामांकन और नाम वापसी के बाद ही यह तय होगा कि किस वार्ड में सीधा मुकाबला होगा और कहां चुनावी रण बहुकोणीय बनेगा। इतना तय है कि केकड़ी पंचायत समिति के चुनाव में टिकट की जंग के साथ सियासी प्रतिष्ठा की परीक्षा भी होने वाली है।
