नामांकन वापसी का अंतिम दिन: भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर, टिकट से नाराज अपनों को साधने में जुटे दिग्गज; दोपहर 3 बजे बाद साफ होगी चुनावी तस्वीर
केकड़ी। नगर पालिका चुनाव में टिकट वितरण के बाद शुरू हुई नाराजगी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय नामांकन दाखिल करने वाले पार्टी के ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए दोनों दलों के नेता पूरी ताकत झोंक रहे हैं।कई वार्डों में टिकट के दावेदारों ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ही निर्दलीय ताल ठोक दी है। ऐसे में बागियों की मौजूदगी ने भाजपा-कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर दी है। पार्टी नेताओं की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि बागी नामांकन वापस लेकर पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में आ जाएं।
कहीं बागी बिगाड़ेंगे गणित, कहीं बदलेंगे जीत-हार का समीकरण–टिकट नहीं मिलने की नाराजगी में मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी अब दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौती बन गए हैं। कई वार्डों में बागी प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण और समर्थकों का नेटवर्क सीधे तौर पर चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।इसी कारण भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेता एक-एक बागी से संपर्क कर उन्हें मनाने में जुटे हैं। कहीं व्यक्तिगत बातचीत का सहारा लिया जा रहा है तो कहीं भविष्य में राजनीतिक सम्मान और संगठन में भूमिका का भरोसा देकर समझाइश की जा रही है।
आज 3 बजे तक आखिरी मौका–नामांकन वापसी का आज अंतिम दिन है। दोपहर 3 बजे तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी और यह तय हो जाएगा कि कौन आमने-सामने है और कहां मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने वाला है।
पार्टी के सामने दोहरी चुनौती–भाजपा और कांग्रेस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ खड़े हुए अपनों को चुनाव मैदान से हटाना है। यदि बागी मैदान में डटे रहते हैं तो दोनों दलों के वोटों में सेंध लगने की आशंका है। यही वजह है कि नाम वापसी के अंतिम घंटों में राजनीतिक संपर्क और मान-मनुहार का दौर और तेज होने के आसार हैं।नामांकन वापसी के बाद ही पता चलेगा कि कितने बागी माने और कितने अपने ही दल के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनावी मैदान में डटे रहे। इसके साथ ही केकड़ी नगर पालिका चुनाव की असली चुनावी चौसर पूरी तरह बिछ जाएगी।