
सरवाड़। खरीफ फसलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए कृषि विभाग की निरीक्षण टीम ने सरवाड़ उपखंड के हिंगोनियां, सरवाड़, गोयला और सराणा क्षेत्र में खेतों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मूंग और उड़द की फसल में पीला शिरा मोजेक रोग का प्रकोप सामने आया। कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार मूंग-उड़द के बुवाई क्षेत्र के करीब 20 से 30 फीसदी हिस्से में रोग के लक्षण पाए गए हैं, जबकि रोग के कारण करीब 25 से 30 फीसदी तक फसल क्षति का प्राथमिक आकलन किया गया है। मूंग की अपेक्षा उड़द की फसल में रोग का असर अधिक पाया गया। वहीं ज्वार की फसल में माहू कीट का प्रकोप भी सामने आया है।
कृषि विभाग के अनुसार सरवाड़ तहसील क्षेत्र में इस खरीफ सीजन में करीब 18,638 हेक्टेयर में मूंग, 6,766 हेक्टेयर में उड़द, 20,817 हेक्टेयर में ज्वार तथा 3,551 हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा की बुवाई का अनुमान है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों से फसलों की स्थिति, रोग-कीट के प्रकोप और खेती में आ रही समस्याओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मूंग और उड़द की रोगरोधी किस्मों में पीला शिरा मोजेक का प्रकोप अपेक्षाकृत कम पाया गया। कृषि अधिकारियों ने किसानों को आगामी सीजन में रोगरोधी किस्मों का चयन करने की सलाह दी। विभाग के अनुसार पीला शिरा मोजेक वायरस जनित रोग है, जो रस चूसक सफेद मक्खी के माध्यम से संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों में फैलता है। सफेद मक्खी का प्रभावी नियंत्रण और शुरुआती अवस्था में रोगग्रस्त पौधों को खेत से निकालने से रोग के प्रसार को कम किया जा सकता है।खेतों में निरीक्षण के दौरान उड़द की फसल में पीला शिरा मोजेक का असर अधिक दिखाई दिया। रोग की चपेट में आने पर पौधों की पत्तियों पर पीलापन और पीली धारियां दिखाई देने लगती हैं। इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन में गिरावट की आशंका रहती है। किसानों ने अधिकारियों को फसल की स्थिति से अवगत कराया और रोग की रोकथाम के उपायों की जानकारी ली।
ज्वार की फसल में माहू कीट का प्रकोप भी दर्ज किया गया। कृषि विभाग के अनुसार माहू रस चूसने वाला कीट है, जो पौधों से रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है। कीट द्वारा चिपचिपा पदार्थ छोड़े जाने से भी पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। विभाग ने किसानों को नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने तथा प्रकोप दिखाई देने पर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी।कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और रोग-कीट के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी। अधिकारियों ने पीला मोजेक एवं रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों, जैसे इमिडाक्लोप्रिड एवं डाइमिथोएट के सावधानीपूर्वक उपयोग की सलाह दी। कीटनाशकों का प्रयोग अनुशंसित मात्रा में ही करने तथा शाम के समय छिड़काव करने और सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने पर जोर दिया गया।कृषि विभाग के अनुसार फिलहाल अन्य खरीफ फसलों में किसी बड़े कीट या रोग की समस्या सामने नहीं आई है। विभाग ने किसानों से लगातार खेतों की निगरानी रखने तथा फसल में असामान्य लक्षण दिखाई देने पर कृषि अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।
निरीक्षण टीम में सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) केकड़ी रामनिवास जांगिड़, कृषि अधिकारी डॉ. पप्पू खटीक, सहायक कृषि अधिकारी सरवाड़ अकलेश कुमार खटीक, गोयला के सहायक कृषि अधिकारी लालू प्रसाद यादव, सराणा के सहायक कृषि अधिकारी महीपाल गेणा, कृषि पर्यवेक्षक अनिता चौधरी एवं ममता खानपुरिया सहित क्षेत्र के किसान मौजूद रहे। निरीक्षण उच्च जिला अधिकारियों के निर्देशन में सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) की अध्यक्षता में किया गया।